असेम्बल्ड कंप्यूटर ब्रांडिड कंप्यूटर से बेहतर क्यों…..
अंग्रेज़ी में छपे इस लेख का हिन्दी अनुवाद, थोड़े बदलाव के साथ।
मैंने सोचा था कि यह प्रश्न बहुत पुराना हो गया है, कदाचित् आऊट ऑफ़ फैशन भी हो गया कि कोई इसको पूछता नहीं। यकीनन, पिछले दो-तीन वर्षों से किसी ने मुझसे यह प्रश्न नहीं पूछा था, कदाचित् कोई ऐसा मिला नहीं था जिसको पूछने की आवश्यकता हो। पर अभी हाल ही में इस प्रश्न ने पुनः सिर उठाया तो मुझे लगा कि नहीं, यह प्रश्न तब तक ताज़ा रहेगा जब तक पहली बार कंप्यूटर लेने वाले रहेंगे। हाल ही में एक मामा जी ने भी कंप्यूटर लिया तो उनको भी बताया कि दोनों में फर्क क्या है और असेम्बल किया कंप्यूटर क्यों बेहतर रहेगा।
बने बनाए कंप्यूटर बेचने वाली कई कंपनियाँ भारत में इस समय मौजूद हैं, जैसे कि एचपी (HP), डैल (Dell), ज़ेनिथ (Zenith), एलजी (LG) आदि, और इनके पहले से बने बनाए कई मॉडल बाज़ार में उपलब्ध हैं।
तो आईये पहले जानते हैं – क्या है ब्रांडिड कंप्यूटर?
कोई भी ऐसा कंप्यूटर जिसको किसी एक कंपनी में भिन्न पुर्जे जोड़ के बनाया गया हो और उस पर कंपनी का ठप्पा लगा के एक संपूर्ण कंप्यूटर के रूप में बेचा जाता हो उसको आम भाषा में ब्रांडिड कंप्यूटर कह सकते हैं। कंपनी भिन्न कॉन्फ़िगरेशन के भिन्न मॉडल बाज़ार में निकालती है ताकि अलग-२ ज़रूरत वाले ग्राहकों को माल बेच सके। ऐसी कंपनियाँ अधिकतर पुर्ज़े बाज़ार में आम रूप से मिलने वाले उठाती है। यदि कंपनी बड़ी है तो वह कुछ पुर्ज़े उसके निर्माताओं से ठेके पर भी बनवाती है और उन पर अपना ठप्पा लगवा के अपने माल के साथ निकालती है।
तो क्या बुराई है ब्रांडिड कंप्यूटरों में? कोई बुराई नहीं है। जी हाँ, ऐसे कंप्यूटर में कोई बुराई नहीं होती। आप वैसे भी यहाँ बुराई नहीं पढ़ने आए हैं, मकसद है कि आपके लिए क्या अधिक बेहतर है। तो फोकस इसलिए उसी पर रखते हैं।
हाँ तो यदि आप माइक्रोसॉफ़्ट विन्डोज़ अथवा लिनेक्स का प्रयोग करने वाले हैं तो आपके लिए बढ़िया बात यह है कि आप अपना कंप्यूटर स्वयं अथवा किसी अन्य के द्वारा बनवा सकते हैं और उस पर अपनी पसंद का ऑपरेटिंग सिस्टम आदि डाल सकते हैं। यदि आप एप्पल भक्त हैं तो आप वैसे ही कैद प्रिय व्यक्ति हैं जिसका स्वतंत्रता की हवा में खाना हज़म नहीं होता, इसलिए आप एप्पल का मैक उन्हीं से खरीदिए, यदि अपने आप कंप्यूटर जोड़ के बनाया और उस पर एप्पल का ऑपरेटिंग सिस्टम डाला तो यह गैरकानूनी है, चाहे बेशक आपने ऑपरेटिंग सिस्टम एप्पल से खरीदा हो। एप्पल की शर्तों के मुताबिक उनका ऑपरेटिंग सिस्टम उन्हीं के हार्डवेयर पर इंस्टॉल किया जा सकता है, किसी अन्य पर करना शर्तों का उल्लंघन है और वे आप पर मुकदमा भी ठोक सकते हैं।
बहरहाल, हम खुले कंप्यूटरों की बात कर रहे थे न कि जेल और कैदखानों की, इसलिए सब स्टैन्डर्ड माल की बात नहीं करते, बढ़िया और उससे बढ़िया माल पर ही फोकस रखते हैं।
तो अब अगला प्रश्न है कि – असेम्बल्ड कंप्यूटर क्या होते हैं?
यदि आप बाज़ार में मिलने वाले कंप्यूटर के भिन्न पुर्ज़ों को स्वयं या किसी अन्य के द्वारा जुड़वा के कंप्यूटर बनाते हैं तो उसको असेम्बल्ड कंप्यूटर यानि कि जोड़ा गया कंप्यूटर कहते हैं।
यदि आप सोच रहे हैं कि बात तो एक ही सी हुई तो आईये ज़रा थोड़ा और गौर करते हैं।
ब्रांडिड कंप्यूटर एक तय कॉन्फ़िगरेशन में आते हैं जिसको बेचने वाली कंपनी निर्धारित करती है। प्रायः इनमें फेरबदल करने की गुंजाईश नहीं होती, थोड़ा बहुत जो फेरबदल आप कर सकते हैं उसका होना न होना एक समान होता है। और कोई आवश्यक नहीं कि कंपनी जो कॉन्फ़िगरेशन दे रही है वह आपकी आवश्यकताओं के अनुरूप सही हो। मान लीजिए आपको एक अधिक शक्तिशाली कॉन्फ़िगरेशन का कंप्यूटर चाहिए ताकि आप उस पर अपने व्यवसाय संबन्धित कुछ भारी सॉफ़्टवेयर भी चला सकें और घर के अन्य सदस्य भी उस पर कार्य कर सकें, फिल्म देख सकें, लेकिन फिल्म देखना और गाने सुनना मुख्य उद्देश्य नहीं है। तो ऐसे में ऐसा ताकतवर कॉन्फ़िगरेशन वाला कंप्यूटर आपके किस काम का जिसमें एक गेमिंग कार्ड और उच्च स्तरीय साउंड कार्ड हो जब आपको कंप्यूटर पर न ही वीडियो गेम खेलने हैं और न ही उच्च स्तरीय आवाज़ से कोई लाभ उठा पाएँगे क्योंकि स्पीकर तो आप हल्के और सस्ते वाले ले रहे हैं। तो ऐसे में वह बढ़िया गेमिंग कार्ड और उच्च स्तरीय साउंड कार्ड आपके लिए बेकार है और उसको न लेकर दाम में काफ़ी अंतर आ सकता है क्योंकि ये दोनों ही चीज़ें सस्ती नहीं आती हैं!!
दूसरी बात यह कि ब्रांडिड कंप्यूटर बेचने वाली कंपनियाँ सिर्फ़ कुछ ही पुर्ज़े बढ़िया क्वालिटी के प्रयोग करती हैं। ये वे पुर्ज़े होते हैं जिनको वे अपने विज्ञापनों में भी बताती हैं जो कि प्रायः प्रोसेसर और मदरबोर्ड ही होता है, मदरबोर्ड भी कम ही होता है, अधिकतर प्रोसेसर बता के ही कंप्यूटर बेचा जाता है। और यहीं सारा गोलमाल हो जाता है। यदि आप कंप्यूटर की तकनीकी कॉन्फ़िगरेशन को ध्यान से देखें तो पाएँगे कि हार्डडिस्क हल्की वाली लगी होगी और वह लगी होगी जो सबसे सस्ती मिली। ऐसे ही कंप्यूटर की मेमोरी यानि कि रैम (RAM) भी निचले स्तर की होगी। कंप्यूटर की स्क्रीन, कीबोर्ड, माउस, कैबिनेट, पॉवर सप्प्लाई आदि सभी पर कंपनी का अपना ठप्पा लगा होगा जो कि उसने सबसे सस्ते निर्माता से एकसाथ काफ़ी मात्रा में लिए होंगे। ऐसा करके कंपनी हार्डवेयर की अपनी लागत को कम रखती है, और आगे महँगे दाम पर बेच देती है। बाकी कुछ हो न हो, इन कंपनियों ने एप्पल से यह सीखा है कि जो चीज़ देखने में सुन्दर हो उसको खरीदने वाले बहुत मिल जाएँगे, चाहे बेशक अंदर से माल कूड़ा हो लेकिन पैकिंग बढ़िया होनी चाहिए।
इसमें कोई बुराई है? नहीं कोई बुराई नहीं है क्योंकि हर व्यवसाय का उद्देश्य मुनाफ़ा कमाना है। परन्तु यहाँ आपको कंपनी की अच्छाई या बुराई नहीं देखनी, यहाँ आपका उद्देश्य अपना मुनाफ़ा देखना है कि आपको आपके पैसे के मुताबिक सही चीज़ मिल रही है कि नहीं। तो अब देखते हैं असेम्बल्ड कंप्यूटर को।
असेम्बल्ड कंप्यूटर में आप अपनी पसंद के पुर्ज़े लगवा सकते हैं। असेम्बल्ड कंप्यूटर के ब्रांडिड कंप्यूटर के ऊपर निम्न लाभ हैं:
- ब्रांडिड कंप्यूटर के मामले में आपके पास बहुत ही कम विकल्प होते हैं जबकि असेम्बल्ड कंप्यूटर के मामले में आपके पास विकल्प ही विकल्प होते हैं।
- असेम्बल्ड कंप्यूटर में आप जितने पैसे खर्च कर रहे हैं उसके अनुसार आपको उत्तम चीज़ मिलती है, यानि कि जितना गुड़ उतना ही मीठा परन्तु ब्रांडिड कंप्यूटर में आप जितना डालेंगे उससे कम ही आपको मिलेगा, जैसे कि यदि पचास हज़ार डाले तो तकरीबन तीस हज़ार का ही माल मिलेगा।
- असेम्बल्ड कंप्यूटर में ब्रांडिड कंप्यूटर का अतिरिक्त बोझ नहीं होता। ब्रांडिड कंप्यूटर वाली कंपनियाँ विज्ञापन आदि करती हैं, उसका खर्च वे खरीददार की जेब से ही तो निकालती हैं। असेम्बल्ड कंप्यूटर में न कोई विज्ञापन है और न ही उसका खर्च देने का डर, इसलिए आप जो खर्च करते हैं आपको वही चीज़ मिलती है।
एक और बात जो ब्रांडिड कंप्यूटरों के खिलाफ़ जाती है वह यह कि यदि आपने विन्डोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम वाला कंप्यूटर लिया है तो उसके पैसे तो आपको देने पड़ेंगे लेकिन उसकी ओरिजिनल सीडी/डीवीडी आपको नहीं मिलती। जो मिलती है वह रीस्टोर डिस्क होती है जो कि आपके कंप्यूटर को ठीक वैसा बना देगी जैसा आपको कंपनी ने बेचा था!! साथ ही आपको विन्डोज़ का वही संस्करण मिलेगा जो कि कंपनी दे रही है, आप अपनी पसंद का संस्करण नहीं ले सकते। कुछ कंपनियाँ अपने महँगे कंप्यूटरों के साथ अलग संस्करण लेने का विकल्प देती हैं जिसमें आप उस अलग संस्करण के अतिरिक्त पैसे देकर उसको पा सकते हैं।
इसकी जगह आप कंप्यूटर को असेम्बल कराएँ और विन्डोज़ के पसंदीदा संस्करण को स्वयं ही खरीद सकते हैं, कोई टेन्शन ही नहीं, विकल्प ही विकल्प हैं। यदि आपको विन्डोज़ नहीं चाहिए और लिनेक्स डालना चाहते हैं तो वह भी कर सकते हैं। लेकिन ब्रांडिड कंप्यूटर लेने पर आपको कंपनी द्वारा निर्धारित विन्डोज़ ही लेना पड़ेगा। कुछ कंपनियाँ अपने निम्न स्तर के कंप्यूटर मॉडलों को असेम्बल्ड जैसा सस्ता बनाने के लिए उनको लिनेक्स अथवा बिना ऑपरेटिंग सिस्टम के निकाल रही हैं लेकिन उच्च कॉन्फ़िगरेशन के कंप्यूटर के साथ तो विन्डोज़ ही लेना पड़ेगा, क्योंकि विन्डोज़ की प्रत्येक बिक्री पर इन कंपनियों की भी तो कमाई होती है!! तो यदि आपको उच्च कॉन्फिगुरेशन वाला कंप्यूटर बिना विन्डोज़ के चाहिए तो बेहतर है कि असेम्बल ही कराएँ।
एक अन्य समस्या जो ब्रांडिड कंप्यूटरों के साथ है और असेम्बल्ड कंप्यूटरों के साथ नहीं है वह यह कि ब्रांडिड कंप्यूटरों में कंपनियाँ कुछ सॉफ़्टवेयरों के ट्रॉयल संस्करण डाल के आपको कंप्यूटर देती हैं। अब यदि आप सोच रहे हैं कि ऐसा क्यों तो वह इसलिए क्योंकि जिन सॉफ़्टवेयरों के ट्रॉयल वर्ज़न डाल के दिए जाते हैं उन सॉफ़्टवेयर की निर्माता कंपनियाँ इन कंप्यूटर कंपनियों को पैसे देती हैं उनका विज्ञापन करने के लिए कि वे हर बिकने वाले कंप्यूटर में उनके सॉफ़्टवेयर के ट्रॉयल डाल के दें। और इधर आप सोच रहे हैं कि आपने पैसे दिए हैं तो आपकी मर्ज़ी क्यों नहीं है कंप्यूटर में, काहे आप फालतू सॉफ़्टवेयरों को झेलें और उनको बाद में हटाते फिरें!! और यह जान लीजिए कि आपकी मन मर्ज़ी नहीं चलेगी इसमें, ट्रॉयल सॉफ़्टवेयर तो वे डाल के ही देंगे चाहे आपको चाहिए हों अथवा नहीं, बेशक आप बाद में उनको हटा दें। और एक समस्या यह कि जो रीस्टोर डिस्क कंप्यूटर कंपनी आपको देगी उसमें भी ये सॉफ़्टवेयर होंगे, तो कल को यदि आप अपने कंप्यूटर को रीस्टोर करते हैं तो ये सॉफ़्टवेयर पुनः डल जाएँगे। फिर से हटाना होगा आपको उन सॉफ़्टवेयरों को।
एक और समस्या जो मैंने ब्रांडिड कंप्यूटरों में देखी है वह यह कि वे लोग आपकी हार्डडिस्क के विभाजन आदि में भी अपनी मन मर्ज़ी चलाते हैं, ज़रा सा आपने ऐसा कर दिया या वैसा कर दिया तो वारंटी वगैरह सब गई पानी में। जो विभाजन उन्होंने कर के दिए हैं आपको वही रखने होंगे, न कम न ज़्यादा!! और साथ ही यदि कोई अन्य पुर्ज़ा लगवाते हैं तो वह उसी कंपनी से लगवाएँ, मसलन कीबोर्ड माउस आदि भी, नहीं तो वारंटी खतरे में!!
सपोर्ट?
इतने सब के बाद यदि आप सोच रहे हैं कि सपोर्ट तो बढ़िया होता है इन कंपनियों का, लोकल असेम्बल करने वालों के मुकाबले, तो आप गलत सोच रहे हैं। सपोर्ट तकनीशियन के आने के ही औने पौने दाम लिए जाते हैं, कुछ खराबी है तो उसके अलग हैं ही। और कंप्यूटर ठीक करना कोई अणु विज्ञान नहीं है कि उसके लिए डॉक्टरेट की आवश्यकता है, यह ऐसी जानकारी है जिसको कोई भी आसानी से प्राप्त कर सकता है और ठीक भी कर सकता है, इन कंपनियों से आने वाले तकनीशियन भी बीई (BE) बीटैक (BTech.) वाले इंजीनियर नहीं होते!! बल्कि कई बार तो मैंने ऐसे सपोर्ट तकनीशियनों को मामूली सी दिक्कतों में उलझते देखा है।
उदाहरण के लिए: एकाध वर्ष पहले का वाकया है, मेरे एक परिचित ने एचपी का कंप्यूटर लिया हुआ था। उनकी वारंटी समाप्त हो गई थी एकाध महीना पहले और उनके कंप्यूटर में वॉयरस आ गया जिससे कि कंप्यूटर को प्रयोग करने में काफ़ी दिक्कत आ रही थी। उन्होंने कंपनी वालों को फोन लगाया तो एक तकनीशियन उनके घर पहुँच गया, तकनीशियन के हाज़िरी लगाने की ही फीस कोई हज़ार रूपए थी। सब देखने के बाद तकनीशियन ने कहा कि कंप्यूटर में कुछ ज़्यादा ही गड़बड़ हो गई है, उसको कंपनी भेजना होगा जहाँ एक्सपर्ट इंजीनियर उसकी छानबीन करके सुधारेंगे। वे मुझे मिले तो मुझसे बोले कि मैं चल कर देख लूँ क्या समस्या है नहीं तो खामखा दो-तीन हज़ार ठुक जाएँगे। मैंने जाकर देखा कि वॉयरस कौन सा है, अपने घर आकर गूगल पर खोजा और उसके कई उपाय मिल गए। नॉर्टन एन्टीवॉयरस बनाने वाली कंपनी सिमेन्टेक भी वॉयरस हटाने के सॉफ़्टवेयर मुफ़्त देती है, तो उसकी वेबसाइट से उतारे गए एक दो टूल की सहायता से वॉयरस को परिचित के कंप्यूटर से हटा दिया। उसके बाद अवास्ट एन्टीवॉयरस उनके कंप्यूटर पर स्थापित कर दिया और उसको ऑटो अपडेट पर रख दिया ताकि इंटरनेट से जुड़ने पर अपने आप अपडेट होता रहे। वह दिन है और आज का दिन है, उन परिचित को कभी कंप्यूटर कंपनी में पुनः फोन करने की आवश्यकता नहीं पड़ी, न ही मुझसे किसी समस्या के लिए सहायता माँगने की आवश्यकता पड़ी और न ही उनके कंप्यूटर में कभी वॉयरस आया।
इसलिए आज भी मेरा यह मानना है कि असेम्बल्ड कंप्यूटर ब्रांडिड कंप्यूटर से बेहतर होते हैं, पैसी की पूरी कीमत वसूलवाते हैं। साल भर पहले मैंने अपना पुराना कंप्यूटर को सेवा निवृत्त करके नया कंप्यूटर असेम्बल कराया था और उस समय बाज़ार में उपलब्ध सबसे अधिक शक्तिशाली प्रोसेसर मदरबोर्ड आदि लगवाए थे। मेरे उस कंप्यूटर की जो लागत आई थी उससे डेढ़ गुणा अधिक दाम में कंप्यूटर कंपनियाँ मेरे कंप्यूटर की आधी क्षमता वाले कंप्यूटर उस समय बाज़ार में बेच रही थीं!! कहने के लिए कदाचित् इतना ही काफ़ी है।
in आह ये कंप्यूटर
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बच के रहना, ये कम्पनियां तुमपर मुकदमा ठोक देंगी, सच्चाई बता कर इनके बिजनेस पर असर डालने की कोशिश जो की है.
सही विश्लेषण. परंतु लैपटॉप के लिए अब तक असेम्बल्ड सिस्टम की व्यवस्था क्यों नहीं हो पाई पता नहीं, नहीं तो मुझे अपने कॉम्पैक लैपटॉप के साथ भुगतना नहीं पड़ता.
बहुत बढ़िया! इतना विस्तार से समझाने के लिये साधुवाद! यह लेख अत्यन्त व्यावहारिक महत्व का है। बहुतोंको इससे लाभ मिलेगा। ऐसे ही लेख हिन्दी को समृद्ध बनायेंगे।
हाँ, असैम्बल्ड कम्प्युटर अच्छे होते हैं, सस्ते भी होते हैं, और दूर तक चलते हैं, मेरा पिछला कम्प्युटर ७ साल का हो गया, इसके साथ मेरे एक रिश्तेदार ने भी किसी अच्छी कम्पनी का ब्रान्डेड कम्प्युटर लिया था, वो उनकी जेब पर भी भारी पडा, और कब का कबाड मे बदल गया है…
इसलिये असैमबल्ड क्मप्युटर ही लेना चाहिये
हिन्दी को इ-हाऊ (http://www.ehow.com/) या विकि-हाऊ (http://www.wikihow.com/Main-Page) जैसी चीज की महती आवश्यकता है।
Well written. Very useful for Hindi speakers.
रवि जी, लैपटॉप में डेस्कटॉप कंप्यूटर के मुकाबले थोड़ी उच्च तकनीक लगती है, हर कंपनी बढ़िया लैपटॉप नहीं बना पाती, गर्म होने की समस्या से सभी जूझ रहे हैं। मेरी जानकारी में एप्पल और सोनी ही ऐसी दो कंपनियाँ हैं जिन्होंने इसमें अभी तक कुछ महारत हासिल की है। इसलिए कदाचित भारत में अभी लैपटॉप असेम्बल नहीं होते। वैसे विदेश में मिल जाते हैं, एलियन वेयर एक ऐसी कंपनी है जो कि ग्राहक की कॉन्फ़िगरेशन के अनुसार उसको लैपटॉप और डेस्कटॉप कंप्यूटर बना के बेचती है। यदि आप अमेरिका आदि में लैपटॉप खरीद रहे हैं तो सोनी और डैल जैसी कंपनियाँ आपको काफ़ी हद तक अपने अनुसार कॉन्फ़िगरेशन चुन के लैपटॉप लेने देती हैं, आप इनकी वेबसाइट पर अपने अनुसार लैपटॉप में फेरबदल कर सकते हैं। डैल ने तो भारत में भी ऐसी सुविधा देनी आरंभ कर दी है, उसकी भारतीय वेबसाइट पर आप लैपटॉप को अपने अनुसार काफ़ी हद तक कर सकते हैं।
परन्तु सोनी अभी अधिक कॉन्फ़िगरेशन नहीं करने देता अपनी भारतीय वेबसाइट पर।
पसंद करने के लिए धन्यवाद अनुनाद जी, सुब्रहमणियन साहब।
बहुत बढ़िया जानकारी, आभार!
सदा बहार जानकारी से भरपूर लेख
!
अच्छा लिखा है आपने ये समस्या लगभग सभी के साथ ही है, आपने बहुत ही बढ़िया विश्लेषण किया उसके लिए धन्यवाद, एक बात और कहना चाहूँगा कि कंप्यूटर और इंटरनेट के नये यूज़र जो कि चाहते है कि ई-मेल कैसे होता है चेटिंग, ओर्कूट को कैसे चलाते है ? यदि इस संबंध में लेख प्रकाशित करें तो नये यूज़र्स के लिए बहुत ही लाभकारी होगा..
बहुत शानदार जानकारी पूर्ण विस्तृत लेख, पहली बार कम्प्यूटर लेने वालों के लिए यह बहुत उपयोगी सिद्ध होगा।
ब्राण्डिड vs असॅम्बल्ड के मामले में मेरे तथा तुम्हारे विचार बहुत मिलते हैं। ब्राण्डिड में मैंने भी मुख्य यही कमी देखी है कि आप अपनी मर्जी का कॉन्फ़िगरेशन नहीं चुन सकते। इसके अतिरिक्त जो अगर लगभग समान कॉन्फ़िगरेशन भी चुनें तो ब्राण्डिड कम से कम ५००० से १०००० तक महंगा पड़ेगा। पहली बार कम्प्यूटर लेने वाले कई लोग तो बेचारे ब्राण्डिड मतलब कम्पनी का और असॅम्बल्ड मतलब देसी समझते हैं। कम्प्यूटर वाले तो प्रोसॅसर आदि बता कर ग्राहक को समझा देते हैं कि असॅम्बल्ड २०००० का है, ब्राण्डिड २२००० का, ब्राण्डिड ही ले लो। लेकिन असल अन्तर बहुत ज्यादा होता है, २०००० वाले असॅम्बल्ड के मुकाबले २२००० वाला ब्राण्डिड कॉन्फ़िगरेशन के हिसाब से बहुत पीछे होता है। उदाहरण के लिए ब्राण्डिड में अक्सर हार्डडिस्क कम क्षमता की होती है, स्पीकर साधारण वाले होते हैं। अन्य पुर्जों में भी यही बात लागू होती है। इसके अतिरिक्त लोग ब्राण्डिड व असॅम्बल्ड की कीमत की तुलना करते हुए भूल जाते हैं कि ब्राण्डिड के साथ UPS भी अलग से लेना होता है। इसके अलावा मेरे शहर की तरह कई छोटे शहरों में डीलर ब्राण्डिड में भी असली विण्डोज न डालकर (अथवा सीडी/डीवीडी देकर) पाइरेटिड विण्डोज ही डालकर देते हैं। कुल मिलाकर ब्राण्डिड कम्प्यूटर एक खूबसूरत छलावे से ज्यादा नहीं।
मैं भी अक्सर लोगों को असॅम्बल्ड ही लेने की सलाह देता हूँ, लेकिन कुछ लोगों को समझाना मुश्किल होता है। उदाहरण के लिए पिछले दिनों मेरे स्कूल वालों ने चार नए कम्प्यूटर लिए, सभी कॉम्पॅक के थे, बिना स्पीकर बिना UPS के। मैं उनको समझाने में असफल रहा कि इतने में असॅम्बल्ड पाँच आ जाएँगे और वो भी कहीं बढ़िया। उस कम्प्यूटर वाले को कहा कि भाई एक कम्प्यूटर में कार्ड रीडर चाहिए तो वो बोला कि जी इन मॉडलों की कॅबिनेट में तो लग नहीं सकता। कार्ड रीडर वाला मॉडल कोई चार हजार महंगा था। अब किसी को कार्ड रीडर लगवाना हो तो वह चार हजार फालतू खर्च करेगा?
रही बात लॅपटॉप की तो जो कॉन्फ़ीगरेशन सामान्य असॅम्बल्ड कम्प्यूटर में २५००० रुपए में होगी वह लॅपटॉप में लगभग दुगुने की पड़ेगी। अतः जब तक विशेष आवश्यकता न हो, मेरे विचार से डॅस्कटॉप ही बेहतर है।
श्रीश, यदि ये HP, Lenovo, Dell आदि किसी कंपनी के हैं तो इनकी शिकायत कंपनी में की जा सकती है क्योंकि कंपनी वाले ओरिजिनल के पैसे लेते हैं कंप्यूटर के साथ, उसके बिना बेचते ही नहीं।
क्यों खामखा अपना दिमाग खराब करते हो। एक यूएसबी (USB) वाला कार्डरीडर ले आओ, दो-ढाई सौ का आ जाएगा जिसमें हर तरह के मेमोरी कार्ड रीड हो जाएँगे।