फीडबर्नर से गूगल – मेरा ब्रांड और 404 पंगा
कुछ समय पहले गूगल ने अपनी फीडबर्नर सेवा द्वारा बाँटी जाने वाली फीड में एडसेन्स विज्ञापन दिखाने की सुविधा प्रदान की लेकिन शर्त यह कि फीड को फीडबर्नर से गूगल पर स्थानांतरित करना होगा। अब फीडबर्नर द्वारा बाँटी जाने वाली सभी फीड गूगल के सैटअप पर स्थानांतरित होनी है, इसकी अंतिम तिथि 27 फरवरी 2009 जारी कर दी गई है, तब तक जो कोई भी स्वेच्छा से स्थानांतरण नहीं करता है उसको जबरन स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
काल करे सो आज, यह सोच मैंने भी अपने सभी ब्लॉग की फीड कल स्थानांतरित कर ली। क्योंकि मैं फीडबर्नर की मेरा ब्रांड सुविधा का प्रयोगकर्ता हूँ, जिसके तहत फीड का पता मेरे डोमेन का ही होता है चाहे बेशक बाँटने वाला फीडबर्नर हो, तो मैंने सोचा कि स्थानांतरण का मामला आराम से राजी-खुशी निपट जाएगा बिना किसी दिक्कत के। स्थानांतरण के बाद मेरा ब्रांड की सैटिंग वाले पन्ने पर दिए निर्देशों के अनुसार डीएनएस (DNS) के सीनेम (CNAME) रिकॉर्ड भी अपडेट कर लिए लेकिन ऐसा करते ही सभी फीड पते 404 वाला दोष दिखाने लगे, सभी फीड गायब हो गई!!
थोड़ा इधर-उधर खोजने पर फीडबर्नर के गूगल समूह में ज्ञात पंगों का पृष्ठ मिला और पता चला कि यदि गूगल पर स्थानांतरण से पहले भी मेरा ब्रांड वाली सुविधा का प्रयोग किया जा रहा था जो उस स्थिति में स्थानांतरण के बाद सीनेम रिकॉर्ड अपडेट करते ही 404 वाला पहलवान सामने आ खड़ा होगा। इसका इलाज यह बताया गया है कि स्थानांतरण के बाद नए वाले फीडबर्नर कंट्रोल पैनल में मेरा ब्रांड के पन्ने पर जाकर उसको निष्क्रिय कर दिया जाए और उसके बाद पुनः सक्रिय करके सभी डोमेन वापस डाले जाएँ (जो निष्क्रिय करने से पहले डाल रखे थे, जिन पर मेरा ब्रांड प्रयोग हो रहा है)।

यह तरकीब काम करती है, इस बात की पुष्टि मैं कर सकता हूँ। इस तरकीब को आज़माते ही मेरे सभी मेरा ब्रांड छाप फीड पते पुनः सामान्य रूप से कार्य करने लगे बिना किसी दिक्कत!! इस पंगे को जान गलियाने का मन अवश्य कर सकता है, गूगल में किसी ने कहीं कोई पंगा किया जिसका नतीजा यह निकला और जिसके इलाज लिए यह नुस्खा बताया गया!!
याहू की मोबाइल वेबसाइट का नया शृंगार …..
बीते कुछ महीनों मोबाइल इंटरनेट की दुनिया में काफ़ी तेज़ी से बदलाव आए हैं। यदि यह कहा जाए कि वर्ष 2008 में अब तक सर्वाधिक तेज़ी से मोबाइल इंटरनेट की दुनिया बदली है तो यह अतिश्योक्ति नहीं होगा। मोबाइल २.० इंटरफेस और झकास सी चीज़ों के साथ नई सेवाएँ दाएँ बाएँ से तो निकली ही हैं, पुरानी वेब सेवाएँ भी अपनी लंबी निद्रा से जागती हुई और अपने अड्डों की साफ़ सफ़ाई कर उनको चमकाने का निश्चय लिए दिखाई दी हैं। गूगल और माइक्रोसॉफ़्ट जैसे इंटरनेटिया दैत्यों को भी बढ़ते मोबाइल बाज़ार की सुगन्ध आ गई है, आखिरकार अब मोबाइल इंटरनेट का मामला पहले की भांति बड़े कॉर्पोरेट अधिकारियों और रईसों का शगल नहीं रहा, आम जनता यहाँ भी अपनी पैठ कर रही है।
याहू भी अभी तक सो रहा था, ऐसा ही प्रतीत होता है। यदि उसकी मौजूदा मोबाइल वेबसाइट को देखा जाए तो हो सकता है आपको घोर आश्चर्य हो बाबा आदम के ज़माने की बदसूरत सी वेबसाइट देख कर!!

लेकिन संकटों से घिरा ये दुखियारा दैत्य अब जाग गया है और मोबाइल स्पेस के मामले में सजग दिख रहा है। जहाँ एक ओर इसके इंजीनियर मोबाइल सॉफ़्टवेयर पैकेज याहू गो पर कार्य कर रहे हैं उधर अब ये लोग याहू की मोबाइल वेबसाइट को भी नए क्रांतिकारी शृंगार में लपेटने की तैयारी में हैं। क्रांतिकारी इसलिए कहा क्योंकि यदि आप बाजू में लगे इसकी मोबाइल वेबसाइट के बीटा वर्ज़न का स्क्रीनशॉट देखेंगे तो पाएँगे कि मौजूदा मोबाइल वेबसाइट के मुकाबले यह क्रांतिकारी साज सज्जा ही है!!
और यह सिर्फ़ मोबाइल वेबसाइट का मुख्य पन्ना ही है, या कहें कि मोबाइल वेबसाइट का मुख्य पन्ना कुछ ऐसा दिखेगा जब आप वहाँ लॉगिन करेंगे।
मोबाइल वेबसाइट के इस नए वर्ज़न में लगता है याहू वालों ने अपने सड़े हुए पोर्टल फीचर्स जैसे कि फ्री डाऊनलोड्स, बॉलीवुड, आदि हटा दिए हैं और उनकी जगह मुख्यतः अपनी उन तीन सेवाओं पर ध्यान केन्द्रित किया है जो कि आम प्रयोक्ताओं के अधिक प्रयोग की हैं – ईमेल, मैसेन्जर और फ्लिकर फोटो शेयरिंग सेवा।
इनके साथ ही कुछ आम लेकिन उपयोगी विजेट उपलब्ध कराई हैं जैसे कि मौसम का हाल जो किसी भी पसंदीदा शहर के मौसम का हाल बताएगा, ताज़ा खबरें, वित्तीय बाज़ार संबन्धी समाचार और खेल समाचार। इन सबके साथ याहू वन सर्च की भी सुविधा उपलब्ध है।

तो पहले याहू की सर्वाधिक लोकप्रिय सेवा, याहू ईमेल पर नज़र डालते हैं। ईमेल इनबॉक्स काफ़ी साफ़-सुथरा, हल्का और आसान है जिसमें कोई अनावश्यक की चीज़ नहीं है। यहाँ इनबॉक्स में मौजूद ईमेलों की एक अपूर्ण सूचि दिखती है और नीचे जाने पर आगे की सूचि देखने का विकल्प उपलब्ध है या फिर किसी अन्य फोल्डर में मौजूद ईमेल भी देखी जा सकती है।
ईमेल खोलने पर मोबाइल के लिए उपयुक्त साधारण टेकस्ट फॉर्मेट में संदेश खुलता है और तुरंत खुलता है। चूंकि इस इंटरफेस में एक ही कॉलम है इसलिए ईमेल के विकल्प संदेश के नीचे उपलब्ध होते हैं जहाँ ईमेल संबन्धी विकल्प उपलब्ध हैं जिनमें ईमेल मिटाना अथवा ईमेल का उत्तर देना या ईमेल को किसी अन्य फोल्डर में डालना आदि हैं।





ईमेल लिखने का पन्ना काफ़ी साधारण है और जल्दी लोड होता है। यहाँ एक बात जो मुझे काबिल-ए-गौर लगी वह यह थी कि यदि आपके याहू ईमेल को आपने एक से अधिक ईमेल पतों से संदेश भेजने के लिए सैट किया हुआ है तो इस पन्ने पर भेजने वाले पते को चुनने के लिए एक सूचि मिल जाती है जिसमें सैट किए सभी पते उपलब्ध होते हैं। यही सुविधा गूगल की जीमेल में तो है लेकिन भेजने वाले ईमेल पते को उसके आम प्रयोग वाले वेब इंटरफेस में ही चुना जा सकता है, जीमेल की मोबाइल वेबसाइट और जीमेल के मोबाइल सॉफ़्टवेयर में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है और वहाँ से आप अपने जीमेल पते से ही ईमेल भेज सकते हैं!! यह अजीब अवश्य लगा लेकिन आश्चर्यजनक नहीं लगा, हो सकता है जीमेल की मोबाइल वेबसाइट और सॉफ़्टवेयर में यह सुविधा भविष्य में आ जाए।
अब यदि फ्लिकर की बात की जाए तो वैसे तो फ्लिकर की अपनी मोबाइल वेबसाइट है जिसकी साज-सज्जा सुधारने में वे लगे हुए हैं लेकिन याहू की मोबाइल वेबसाइट के इस नए वर्ज़न में भी फ्लिकर जोड़ दिया गया है। फ्लिकर का पन्ना यहाँ उसके प्ररूपी अभिवादन संदेश के साथ खुलता है जो कि विश्व की अनेक भाषाओं में से एक में होता है। उसके नीचे अन्य विकल्प उपलब्ध होते हैं जैसे कि परिचितों द्वारा अपलोड किए नए फोटो देखना या फ्लिकर पर अपलोड किए गए कुछ चुनिन्दा फोटो देखना या फिर अपने खाते में अपलोड की तस्वीरों पर हालिया हलचल देखना। याहू वन सर्च को यहाँ फ्लिकर से जोड़ दिया गया है ताकि उसका प्रयोग फ्लिकर पर मौजूद तस्वीरों को खोजने के लिए किया जा सके।
याहू की इस नई मोबाइल वेबसाइट में अभी मैसेन्जर को नया रूप नहीं दिया है और खोलने पर मौजूदा मैसेन्जर इंटरफेस ही खुलता है परन्तु आशा है कि इस नई मोबाइल वेबसाइट को लांच करने से पहले उसकी साज-सज्जा भी ठीक कर दी जाएगी। लेकिन बाकी मोबाइल वेबसाइट की ही भांति मैसेन्जर में भी साज-सज्जा के अतिरिक्त कोई अन्य बदलाव आने की आशा नहीं है और कदाचित् वह साधारण एचटीएमएल वाला मैसेन्जर ही रहेगा क्योंकि अभी फिलहाल मोबाइल ब्राऊज़रों में किसी अन्य चीज़ को चलाना दुष्कर कार्य है।
हालांकि याहू की आने वाली यह नई मोबाइल वेबसाइट देखने में काफ़ी साधारण है लेकिन प्रयोग करने में बहुत आसान है और हल्के होने के कारण कम समय में खुलती है और साथ ही मौजूदा वेबसाइट की भांति बाबा आदम के ज़माने के नहीं लगती। अभी यह वेबसाइट बीटा में है और आप इसको यहाँ देख सकते हैं।
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एचटीसी टच एचडी की एक नई फीचर…..
पीडीए.पीएल (PDA.pl) ने एक एचटीसी के काफ़ी प्रत्याशित मोबाइल फोन टच एचडी (Touch HD) का वीडियो रिलीज़ किया है जिसमें इस शानदार फोन की एक और फीचर का पता चला है – इसके टैब को प्रयोक्ता अपने हिसाब से व्यवस्थित कर सकता है और हटा भी सकता है। चाहे बेशक यह फीचर कोई बहुत बड़ी चीज़ न हो लेकिन फिर भी स्वागत योग्य है। और वीडियो भी बहुत अच्छा है जिसका पार्श्व संगीत बढ़िया है, इसलिए आप भी देख ही लें!!
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एचटीसी टच एचडी…..

कुछ सप्ताह पूर्व अपने अन्य फोन मॉडलों के साथ एचटीसी ने एक और फोन की घोषणा की थी, वह फोन जिसका नाम उन्होंने रखा है एचटीसी टच एचडी (HTC Touch HD)। इस फोन के तकनीकी विवरण से यह पता चलता है कि एचटीसी के इस फोन का दिल होगा कुआलकॉम का 528 मेगाहर्ट्ज़ का एमएसएम 7201ए प्रोसेसर जिसमें 512 मेगाबाइट की रॉम (ROM) और 288 मेगाबाइट की रैम (RAM) मेमोरी होगी। इस फोन में 3.8 इंच की टीएफ़टी-एलसीडी (TFT-LCD) टचस्क्रीन लगी होगी जिसका 480 x 800 पिक्सल का डब्लूवीजीए (WVGA) रिज़ोल्यूशन होगा। यह फोन माइक्रोसॉफ़्ट विन्डोज़ मोबाइल 6.1 पर चलेगा जिसके साथ होगा एचटीसी का अब प्रसिद्ध हो चुका टच फ्लो 3डी (Touch Flo 3D) इंटरफेस।
घोषणा के बाद से ही इस फोन ने लोगों में काफ़ी रुचि उत्पन्न कर दी है। इसकी जितनी भी तस्वीरें और वीडियो आदि अभी तक उभर कर आए हैं उन सब के अनुसार तो यह एक बहुत ही जबरदस्त फोन लग रहा है जो कि लोगों की इतनी रुचि का हकदार भी है और उन बेकार फोन मॉडलों की भांति नहीं है जो कि खामखा की फूँक से फूले हुए हैं और जिनको उनकी औकात से अधिक आँका जा रहा है।
लेकिन अभी तक एचटीसी टच एचडी के जितने भी वीडियो आए हैं उनमें से कोई भी अंग्रेज़ी में नहीं आया है(हिन्दी में आने की तो बात ही छोड़ दीजिए)। सबसे पहले पूर्व-समीक्षा वाला जो वीडियो आया था वह फ्रेन्च में था जिसमें एचटीसी टच एचडी को एप्पल आईफोन के साथ मिलाकर देखा गया था कि किसमें कितना दम है और जिसमें साफ़ दिख गया था कि एचटीसी टच एचडी बड़े आराम से आईफोन को पछाड़ रहा है (जो कि वैसे भी कोई कठिन कार्य नहीं है)। इसके बाद तकरीबन आधे घंटे का एक वीडियो जर्मन भाषा में आया था जिसमें एचटीसी टच एचडी की खूबियों को दिखाया गया था। लेकिन अब एक जर्मन वेबसाइट एरिया मोबाइल ने अपनी पूर्व समीक्षा के वीडियो में अंग्रेज़ी के उपशीर्षक (subtitles) लगा के उसको रिलीज़ किया है, तो इसका लाभ यह है कि जो फ्रेन्च और जर्मन भाषाएँ नहीं जानते हैं लेकिन अंग्रेज़ी जानते हैं वे एचटीसी टच एचडी के बारे में और अधिक जान सकते हैं।
अंग्रेज़ी उपशीर्षकों के साथ जर्मन वीडियो निम्न है। उपशीर्षक देखने के लिए वीडियो प्लेयर में नीचे लगी कंट्रोल पट्टी की दायीं ओर लगे त्रिकोण पर क्लिक करें।
और अभी जिस फ्रेन्च वीडियो के बारे में मैंने बताया जिसमे सबसे पहले एचटीसी टच एचडी नज़र आया था, उसका अंग्रेज़ी में डब किया गया वीडियो यूट्यूब पर मिल गया है। निम्न वीडियो में एचटीसी टच एचडी के साथ एप्पल आईफोन को दिखाया गया है और यह साफ़ दिख रहा है कि एचटीसी टच एचडी की स्क्रीन और उसके रंग एप्पल आईफोन की स्क्रीन से ऊँचे दर्ज़े के हैं।
अब नवंबर की प्रतीक्षा बहुत लंबी लग रही है क्योंकि नवंबर के अंत में ही एचटीसी इस झकास फोन को योरोप और एशिया के बाज़ार में उतारेगी।
in मनलुभावन गैजेट
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असेम्बल्ड कंप्यूटर ब्रांडिड कंप्यूटर से बेहतर क्यों…..
अंग्रेज़ी में छपे इस लेख का हिन्दी अनुवाद, थोड़े बदलाव के साथ।
मैंने सोचा था कि यह प्रश्न बहुत पुराना हो गया है, कदाचित् आऊट ऑफ़ फैशन भी हो गया कि कोई इसको पूछता नहीं। यकीनन, पिछले दो-तीन वर्षों से किसी ने मुझसे यह प्रश्न नहीं पूछा था, कदाचित् कोई ऐसा मिला नहीं था जिसको पूछने की आवश्यकता हो। पर अभी हाल ही में इस प्रश्न ने पुनः सिर उठाया तो मुझे लगा कि नहीं, यह प्रश्न तब तक ताज़ा रहेगा जब तक पहली बार कंप्यूटर लेने वाले रहेंगे। हाल ही में एक मामा जी ने भी कंप्यूटर लिया तो उनको भी बताया कि दोनों में फर्क क्या है और असेम्बल किया कंप्यूटर क्यों बेहतर रहेगा।
बने बनाए कंप्यूटर बेचने वाली कई कंपनियाँ भारत में इस समय मौजूद हैं, जैसे कि एचपी (HP), डैल (Dell), ज़ेनिथ (Zenith), एलजी (LG) आदि, और इनके पहले से बने बनाए कई मॉडल बाज़ार में उपलब्ध हैं।
तो आईये पहले जानते हैं – क्या है ब्रांडिड कंप्यूटर?
कोई भी ऐसा कंप्यूटर जिसको किसी एक कंपनी में भिन्न पुर्जे जोड़ के बनाया गया हो और उस पर कंपनी का ठप्पा लगा के एक संपूर्ण कंप्यूटर के रूप में बेचा जाता हो उसको आम भाषा में ब्रांडिड कंप्यूटर कह सकते हैं। कंपनी भिन्न कॉन्फ़िगरेशन के भिन्न मॉडल बाज़ार में निकालती है ताकि अलग-२ ज़रूरत वाले ग्राहकों को माल बेच सके। ऐसी कंपनियाँ अधिकतर पुर्ज़े बाज़ार में आम रूप से मिलने वाले उठाती है। यदि कंपनी बड़ी है तो वह कुछ पुर्ज़े उसके निर्माताओं से ठेके पर भी बनवाती है और उन पर अपना ठप्पा लगवा के अपने माल के साथ निकालती है।
तो क्या बुराई है ब्रांडिड कंप्यूटरों में? कोई बुराई नहीं है। जी हाँ, ऐसे कंप्यूटर में कोई बुराई नहीं होती। आप वैसे भी यहाँ बुराई नहीं पढ़ने आए हैं, मकसद है कि आपके लिए क्या अधिक बेहतर है। तो फोकस इसलिए उसी पर रखते हैं।
हाँ तो यदि आप माइक्रोसॉफ़्ट विन्डोज़ अथवा लिनेक्स का प्रयोग करने वाले हैं तो आपके लिए बढ़िया बात यह है कि आप अपना कंप्यूटर स्वयं अथवा किसी अन्य के द्वारा बनवा सकते हैं और उस पर अपनी पसंद का ऑपरेटिंग सिस्टम आदि डाल सकते हैं। यदि आप एप्पल भक्त हैं तो आप वैसे ही कैद प्रिय व्यक्ति हैं जिसका स्वतंत्रता की हवा में खाना हज़म नहीं होता, इसलिए आप एप्पल का मैक उन्हीं से खरीदिए, यदि अपने आप कंप्यूटर जोड़ के बनाया और उस पर एप्पल का ऑपरेटिंग सिस्टम डाला तो यह गैरकानूनी है, चाहे बेशक आपने ऑपरेटिंग सिस्टम एप्पल से खरीदा हो। एप्पल की शर्तों के मुताबिक उनका ऑपरेटिंग सिस्टम उन्हीं के हार्डवेयर पर इंस्टॉल किया जा सकता है, किसी अन्य पर करना शर्तों का उल्लंघन है और वे आप पर मुकदमा भी ठोक सकते हैं।
बहरहाल, हम खुले कंप्यूटरों की बात कर रहे थे न कि जेल और कैदखानों की, इसलिए सब स्टैन्डर्ड माल की बात नहीं करते, बढ़िया और उससे बढ़िया माल पर ही फोकस रखते हैं।
तो अब अगला प्रश्न है कि – असेम्बल्ड कंप्यूटर क्या होते हैं?
यदि आप बाज़ार में मिलने वाले कंप्यूटर के भिन्न पुर्ज़ों को स्वयं या किसी अन्य के द्वारा जुड़वा के कंप्यूटर बनाते हैं तो उसको असेम्बल्ड कंप्यूटर यानि कि जोड़ा गया कंप्यूटर कहते हैं।
यदि आप सोच रहे हैं कि बात तो एक ही सी हुई तो आईये ज़रा थोड़ा और गौर करते हैं।
ब्रांडिड कंप्यूटर एक तय कॉन्फ़िगरेशन में आते हैं जिसको बेचने वाली कंपनी निर्धारित करती है। प्रायः इनमें फेरबदल करने की गुंजाईश नहीं होती, थोड़ा बहुत जो फेरबदल आप कर सकते हैं उसका होना न होना एक समान होता है। और कोई आवश्यक नहीं कि कंपनी जो कॉन्फ़िगरेशन दे रही है वह आपकी आवश्यकताओं के अनुरूप सही हो। मान लीजिए आपको एक अधिक शक्तिशाली कॉन्फ़िगरेशन का कंप्यूटर चाहिए ताकि आप उस पर अपने व्यवसाय संबन्धित कुछ भारी सॉफ़्टवेयर भी चला सकें और घर के अन्य सदस्य भी उस पर कार्य कर सकें, फिल्म देख सकें, लेकिन फिल्म देखना और गाने सुनना मुख्य उद्देश्य नहीं है। तो ऐसे में ऐसा ताकतवर कॉन्फ़िगरेशन वाला कंप्यूटर आपके किस काम का जिसमें एक गेमिंग कार्ड और उच्च स्तरीय साउंड कार्ड हो जब आपको कंप्यूटर पर न ही वीडियो गेम खेलने हैं और न ही उच्च स्तरीय आवाज़ से कोई लाभ उठा पाएँगे क्योंकि स्पीकर तो आप हल्के और सस्ते वाले ले रहे हैं। तो ऐसे में वह बढ़िया गेमिंग कार्ड और उच्च स्तरीय साउंड कार्ड आपके लिए बेकार है और उसको न लेकर दाम में काफ़ी अंतर आ सकता है क्योंकि ये दोनों ही चीज़ें सस्ती नहीं आती हैं!!
दूसरी बात यह कि ब्रांडिड कंप्यूटर बेचने वाली कंपनियाँ सिर्फ़ कुछ ही पुर्ज़े बढ़िया क्वालिटी के प्रयोग करती हैं। ये वे पुर्ज़े होते हैं जिनको वे अपने विज्ञापनों में भी बताती हैं जो कि प्रायः प्रोसेसर और मदरबोर्ड ही होता है, मदरबोर्ड भी कम ही होता है, अधिकतर प्रोसेसर बता के ही कंप्यूटर बेचा जाता है। और यहीं सारा गोलमाल हो जाता है। यदि आप कंप्यूटर की तकनीकी कॉन्फ़िगरेशन को ध्यान से देखें तो पाएँगे कि हार्डडिस्क हल्की वाली लगी होगी और वह लगी होगी जो सबसे सस्ती मिली। ऐसे ही कंप्यूटर की मेमोरी यानि कि रैम (RAM) भी निचले स्तर की होगी। कंप्यूटर की स्क्रीन, कीबोर्ड, माउस, कैबिनेट, पॉवर सप्प्लाई आदि सभी पर कंपनी का अपना ठप्पा लगा होगा जो कि उसने सबसे सस्ते निर्माता से एकसाथ काफ़ी मात्रा में लिए होंगे। ऐसा करके कंपनी हार्डवेयर की अपनी लागत को कम रखती है, और आगे महँगे दाम पर बेच देती है। बाकी कुछ हो न हो, इन कंपनियों ने एप्पल से यह सीखा है कि जो चीज़ देखने में सुन्दर हो उसको खरीदने वाले बहुत मिल जाएँगे, चाहे बेशक अंदर से माल कूड़ा हो लेकिन पैकिंग बढ़िया होनी चाहिए।
इसमें कोई बुराई है? नहीं कोई बुराई नहीं है क्योंकि हर व्यवसाय का उद्देश्य मुनाफ़ा कमाना है। परन्तु यहाँ आपको कंपनी की अच्छाई या बुराई नहीं देखनी, यहाँ आपका उद्देश्य अपना मुनाफ़ा देखना है कि आपको आपके पैसे के मुताबिक सही चीज़ मिल रही है कि नहीं। तो अब देखते हैं असेम्बल्ड कंप्यूटर को।
असेम्बल्ड कंप्यूटर में आप अपनी पसंद के पुर्ज़े लगवा सकते हैं। असेम्बल्ड कंप्यूटर के ब्रांडिड कंप्यूटर के ऊपर निम्न लाभ हैं:
- ब्रांडिड कंप्यूटर के मामले में आपके पास बहुत ही कम विकल्प होते हैं जबकि असेम्बल्ड कंप्यूटर के मामले में आपके पास विकल्प ही विकल्प होते हैं।
- असेम्बल्ड कंप्यूटर में आप जितने पैसे खर्च कर रहे हैं उसके अनुसार आपको उत्तम चीज़ मिलती है, यानि कि जितना गुड़ उतना ही मीठा परन्तु ब्रांडिड कंप्यूटर में आप जितना डालेंगे उससे कम ही आपको मिलेगा, जैसे कि यदि पचास हज़ार डाले तो तकरीबन तीस हज़ार का ही माल मिलेगा।
- असेम्बल्ड कंप्यूटर में ब्रांडिड कंप्यूटर का अतिरिक्त बोझ नहीं होता। ब्रांडिड कंप्यूटर वाली कंपनियाँ विज्ञापन आदि करती हैं, उसका खर्च वे खरीददार की जेब से ही तो निकालती हैं। असेम्बल्ड कंप्यूटर में न कोई विज्ञापन है और न ही उसका खर्च देने का डर, इसलिए आप जो खर्च करते हैं आपको वही चीज़ मिलती है।
एक और बात जो ब्रांडिड कंप्यूटरों के खिलाफ़ जाती है वह यह कि यदि आपने विन्डोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम वाला कंप्यूटर लिया है तो उसके पैसे तो आपको देने पड़ेंगे लेकिन उसकी ओरिजिनल सीडी/डीवीडी आपको नहीं मिलती। जो मिलती है वह रीस्टोर डिस्क होती है जो कि आपके कंप्यूटर को ठीक वैसा बना देगी जैसा आपको कंपनी ने बेचा था!! साथ ही आपको विन्डोज़ का वही संस्करण मिलेगा जो कि कंपनी दे रही है, आप अपनी पसंद का संस्करण नहीं ले सकते। कुछ कंपनियाँ अपने महँगे कंप्यूटरों के साथ अलग संस्करण लेने का विकल्प देती हैं जिसमें आप उस अलग संस्करण के अतिरिक्त पैसे देकर उसको पा सकते हैं।
इसकी जगह आप कंप्यूटर को असेम्बल कराएँ और विन्डोज़ के पसंदीदा संस्करण को स्वयं ही खरीद सकते हैं, कोई टेन्शन ही नहीं, विकल्प ही विकल्प हैं। यदि आपको विन्डोज़ नहीं चाहिए और लिनेक्स डालना चाहते हैं तो वह भी कर सकते हैं। लेकिन ब्रांडिड कंप्यूटर लेने पर आपको कंपनी द्वारा निर्धारित विन्डोज़ ही लेना पड़ेगा। कुछ कंपनियाँ अपने निम्न स्तर के कंप्यूटर मॉडलों को असेम्बल्ड जैसा सस्ता बनाने के लिए उनको लिनेक्स अथवा बिना ऑपरेटिंग सिस्टम के निकाल रही हैं लेकिन उच्च कॉन्फ़िगरेशन के कंप्यूटर के साथ तो विन्डोज़ ही लेना पड़ेगा, क्योंकि विन्डोज़ की प्रत्येक बिक्री पर इन कंपनियों की भी तो कमाई होती है!! तो यदि आपको उच्च कॉन्फिगुरेशन वाला कंप्यूटर बिना विन्डोज़ के चाहिए तो बेहतर है कि असेम्बल ही कराएँ।
एक अन्य समस्या जो ब्रांडिड कंप्यूटरों के साथ है और असेम्बल्ड कंप्यूटरों के साथ नहीं है वह यह कि ब्रांडिड कंप्यूटरों में कंपनियाँ कुछ सॉफ़्टवेयरों के ट्रॉयल संस्करण डाल के आपको कंप्यूटर देती हैं। अब यदि आप सोच रहे हैं कि ऐसा क्यों तो वह इसलिए क्योंकि जिन सॉफ़्टवेयरों के ट्रॉयल वर्ज़न डाल के दिए जाते हैं उन सॉफ़्टवेयर की निर्माता कंपनियाँ इन कंप्यूटर कंपनियों को पैसे देती हैं उनका विज्ञापन करने के लिए कि वे हर बिकने वाले कंप्यूटर में उनके सॉफ़्टवेयर के ट्रॉयल डाल के दें। और इधर आप सोच रहे हैं कि आपने पैसे दिए हैं तो आपकी मर्ज़ी क्यों नहीं है कंप्यूटर में, काहे आप फालतू सॉफ़्टवेयरों को झेलें और उनको बाद में हटाते फिरें!! और यह जान लीजिए कि आपकी मन मर्ज़ी नहीं चलेगी इसमें, ट्रॉयल सॉफ़्टवेयर तो वे डाल के ही देंगे चाहे आपको चाहिए हों अथवा नहीं, बेशक आप बाद में उनको हटा दें। और एक समस्या यह कि जो रीस्टोर डिस्क कंप्यूटर कंपनी आपको देगी उसमें भी ये सॉफ़्टवेयर होंगे, तो कल को यदि आप अपने कंप्यूटर को रीस्टोर करते हैं तो ये सॉफ़्टवेयर पुनः डल जाएँगे। फिर से हटाना होगा आपको उन सॉफ़्टवेयरों को।
एक और समस्या जो मैंने ब्रांडिड कंप्यूटरों में देखी है वह यह कि वे लोग आपकी हार्डडिस्क के विभाजन आदि में भी अपनी मन मर्ज़ी चलाते हैं, ज़रा सा आपने ऐसा कर दिया या वैसा कर दिया तो वारंटी वगैरह सब गई पानी में। जो विभाजन उन्होंने कर के दिए हैं आपको वही रखने होंगे, न कम न ज़्यादा!! और साथ ही यदि कोई अन्य पुर्ज़ा लगवाते हैं तो वह उसी कंपनी से लगवाएँ, मसलन कीबोर्ड माउस आदि भी, नहीं तो वारंटी खतरे में!!
सपोर्ट?
इतने सब के बाद यदि आप सोच रहे हैं कि सपोर्ट तो बढ़िया होता है इन कंपनियों का, लोकल असेम्बल करने वालों के मुकाबले, तो आप गलत सोच रहे हैं। सपोर्ट तकनीशियन के आने के ही औने पौने दाम लिए जाते हैं, कुछ खराबी है तो उसके अलग हैं ही। और कंप्यूटर ठीक करना कोई अणु विज्ञान नहीं है कि उसके लिए डॉक्टरेट की आवश्यकता है, यह ऐसी जानकारी है जिसको कोई भी आसानी से प्राप्त कर सकता है और ठीक भी कर सकता है, इन कंपनियों से आने वाले तकनीशियन भी बीई (BE) बीटैक (BTech.) वाले इंजीनियर नहीं होते!! बल्कि कई बार तो मैंने ऐसे सपोर्ट तकनीशियनों को मामूली सी दिक्कतों में उलझते देखा है।
उदाहरण के लिए: एकाध वर्ष पहले का वाकया है, मेरे एक परिचित ने एचपी का कंप्यूटर लिया हुआ था। उनकी वारंटी समाप्त हो गई थी एकाध महीना पहले और उनके कंप्यूटर में वॉयरस आ गया जिससे कि कंप्यूटर को प्रयोग करने में काफ़ी दिक्कत आ रही थी। उन्होंने कंपनी वालों को फोन लगाया तो एक तकनीशियन उनके घर पहुँच गया, तकनीशियन के हाज़िरी लगाने की ही फीस कोई हज़ार रूपए थी। सब देखने के बाद तकनीशियन ने कहा कि कंप्यूटर में कुछ ज़्यादा ही गड़बड़ हो गई है, उसको कंपनी भेजना होगा जहाँ एक्सपर्ट इंजीनियर उसकी छानबीन करके सुधारेंगे। वे मुझे मिले तो मुझसे बोले कि मैं चल कर देख लूँ क्या समस्या है नहीं तो खामखा दो-तीन हज़ार ठुक जाएँगे। मैंने जाकर देखा कि वॉयरस कौन सा है, अपने घर आकर गूगल पर खोजा और उसके कई उपाय मिल गए। नॉर्टन एन्टीवॉयरस बनाने वाली कंपनी सिमेन्टेक भी वॉयरस हटाने के सॉफ़्टवेयर मुफ़्त देती है, तो उसकी वेबसाइट से उतारे गए एक दो टूल की सहायता से वॉयरस को परिचित के कंप्यूटर से हटा दिया। उसके बाद अवास्ट एन्टीवॉयरस उनके कंप्यूटर पर स्थापित कर दिया और उसको ऑटो अपडेट पर रख दिया ताकि इंटरनेट से जुड़ने पर अपने आप अपडेट होता रहे। वह दिन है और आज का दिन है, उन परिचित को कभी कंप्यूटर कंपनी में पुनः फोन करने की आवश्यकता नहीं पड़ी, न ही मुझसे किसी समस्या के लिए सहायता माँगने की आवश्यकता पड़ी और न ही उनके कंप्यूटर में कभी वॉयरस आया।
इसलिए आज भी मेरा यह मानना है कि असेम्बल्ड कंप्यूटर ब्रांडिड कंप्यूटर से बेहतर होते हैं, पैसी की पूरी कीमत वसूलवाते हैं। साल भर पहले मैंने अपना पुराना कंप्यूटर को सेवा निवृत्त करके नया कंप्यूटर असेम्बल कराया था और उस समय बाज़ार में उपलब्ध सबसे अधिक शक्तिशाली प्रोसेसर मदरबोर्ड आदि लगवाए थे। मेरे उस कंप्यूटर की जो लागत आई थी उससे डेढ़ गुणा अधिक दाम में कंप्यूटर कंपनियाँ मेरे कंप्यूटर की आधी क्षमता वाले कंप्यूटर उस समय बाज़ार में बेच रही थीं!! कहने के लिए कदाचित् इतना ही काफ़ी है।
in आह ये कंप्यूटर
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नमस्कार दुनिया
डिजिट ब्लॉग के हिन्दी संस्करण पर आपका स्वागत है। डिजिट ब्लॉग को तकरीबन साढ़े तीन वर्ष पहले सन् 2005 में तकनीक की जानकारी देने के मकसद से आरंभ किया गया था। तब से अब तक के सफ़र में कई उतार चढ़ाव आए, इस ब्लॉग को बीबीसी वर्ल्ड के एक इंटरनेट तकनीक संबन्धी प्रसारण में आने से ख्याति भी मिली।
और अब, उसी डिजिट ब्लॉग का यह हिन्दी संस्करण आपके समक्ष प्रस्तुत है अपने उसी तकनीक संबन्धी ज्ञान बाँचने के मिशन को लेकर। इस हिन्दी संस्करण में डिजिट ब्लॉग के अंग्रेज़ी संस्करण पर छपे लेखों और भविष्य में छपने वाले लेखों के हिन्दी अनुवाद भी मिलेंगे और इस पर तकनीक संबन्धी मौलिक हिन्दी लेख भी छपेंगे।
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